अंधेरा
अगर बुराई का प्रतीक है अंधेरा, तो इसमें सुकून बेहता क्यों है अगर खामोशी की दास्तान है अंधेरा तो रातों की नींद क्यों है अगर तन्हाई की बात है अंधेरा तो इन उदास आसुओं के साथ क्यों है अगर राजों को दबाता है अंधेरा तो ख्वाबों को छुपाता क्यों है इतना ही बेजान है अंधेरा तो रात का राजा चांद क्यों है अंधेरे में खुली आंखों को ये रोशनी की दरारें बंद कर देती हैं अगर नींद की खुमारी है अंधेरा तो रोशनी खुली आंखों से देखा ख्वाब क्यूं नहीं है अगर अंधेरे का रंग है काला तो खुशी रंगीन क्यूं नहीं है अगर एक झलक सी मुलाकात है अंधेरा तो लंबा इंतजार क्यूं है अगर किसी की शायरी की झलक है अंधेरा तो किसी खुशबू की मिठास क्यूं है अगर बेहती हवा का झोंका है अंधेरा तो भीगी बरसात क्यूं है