मैं भी तुम्हारा गुरु था कहलाया!!!
मेहरूम थे तुम मुझसे या भूल गए थे मुझे,
आंखें तो नही मिली थी मुझसे पर मेहसूस किया था मुझे.
अब आंखें बंद करके इजाज़त दो मुझे की में तुमसे जुडू,
याद करो वो दिन जब में भी था तुम्हारा गुरु.
जब मेरी सूखी डालो पर वो गीलापन न रह पाया,
तुम्हारे उदास चेहरे ने मुझे अच्छा न दिखने का अहसास था दिलाया,
पर फिर उस कोने की हरी पत्ती ने तुम्हारी मुस्कान को था जागाया,
याद करो मैने तुम्हे उम्मीद न छोड़ना था सिखाया.
तब मैं भी तुम्हारा गुरु था कहलाया!!!
तुम्हारे कानों से सर तक पहुंच कर सर को था दुखाया,
तुमने बड़े शौक़ से irritation का title था मुझे पहनाया,
आखिर में सबसे बुरा था में कहलाया,
याद करो तब मेने तुम्हें ख़ामोशी का महत्त्व था सिखाया.
तब में भी तुम्हारा गुरु था कहलाया!!!!
जाता था में रोज़ और अंधेरे ने अपना राज था जमाया,
ढूंदा तो बहुत था मुझे पर में कहीं नजर ना आया,
अगले दिन मेने फिर आकर तुम्हारे अंदर एक नया जोश था जगाया,
याद करो मैने तुम्हे फिर से उगना था सिखाया.
तब मैं भी तुम्हारा गुरु था कहलाया!!!!
Hello everyone!!! Today is teacher's day, so let's celebrate teachers day within us to every small teacher who taught us something in our life.
You can share your experiences about everything who was once your teacher in the comment section below.
Please share this Post.😊
Nyc
ReplyDeleteIt's relatable
ReplyDeleteNice yar
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