ये उन दिनों की बात है
उदास दिल, मायूस चेहरा
चारों ओर गम का माहौल था फैला
पता नही क्या थी वो बात
जब खामोशी ने अपना दबदबा था फैलाया
मेरी ही कोई ज़िद थी शायद
जिसने सबको गुस्सा था दिलाया
माहौल जो याद आया था
उसने चीख चीख कर बतलाया था
की बात ज़रूरी ही होगी
जिसने य माहौल फैलाया था
ज़ोर दिमाग पर डाला तब वो बात समझ आयी
अपने साथ एक मुस्कान भी थी लाई
बस immaturity आगे थी आई
इसने ही बिना बात की बात थी बनाई
ये उन दिनों की बात है,
जब नाक पर गुस्से ने जमाया था डेरा
और दुनिया ने हमे teenagers था बुलाया
अंधेरा, अंधेरा, अंधेरा
हर जगह अंधेरे ने पहरा था जमाया
बहुत कोशिशों के बाद भी
रोशनी को ढूंढ नहीं था पाया
उम्मीदें जब हुई खत्म
दिल में था थोड़ा गम
जब थक हार कर बैठे हम
तब यूं लगा जैसे दुनिया हो गई ख़तम
पल्कें जब उठी तब पता चला
रोशनी ने तो चारों कोनों कों था घेर रखा
बात सिर्फ़ इतनी ही थी कि
हमने ही अपनी आंखे बंद रखी थी
ये उन दिनों की बात है,
जब आंखें भी नहीं खुली थी
और दुनिया देखने का दावा करते थे हम
Teenagers कहलाया करते थे हम
Amazing Alina 😊
ReplyDelete👏👏💕💕
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